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मसालों के निर्यात में गिरावट, मिर्च और जीरे की कमजोर मांग का असर

मात्रा के लिहाज से भी मसालों का निर्यात 4 प्रतिशत घटकर 17.34 लाख टन रहा, जबकि एक साल पहले यह 17.99 लाख टन था।

Mithilesh Dhar Dubey

Mithilesh Dhar Dubey·ASSOCIATE EDITOR (CONTENT)

मसालों के निर्यात में गिरावट, मिर्च और जीरे की कमजोर मांग का असर

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के मसाला निर्यात को झटका लगा है। प्रमुख मसाला उत्पादों, खासकर मिर्च और जीरे की विदेशी मांग कमजोर रहने के कारण देश का कुल मसाला निर्यात 6 प्रतिशत घटकर 4.43 अरब डॉलर रह गया, जो पिछले वर्ष 4.72 अरब डॉलर था।

मात्रा के लिहाज से भी मसालों का निर्यात 4 प्रतिशत घटकर 17.34 लाख टन रहा, जबकि एक साल पहले यह 17.99 लाख टन था। हालांकि रुपये के हिसाब से निर्यात में गिरावट अपेक्षाकृत कम रही और यह 2 प्रतिशत घटकर 39,140 करोड़ रुपये पर पहुंचा।

भारत के मसाला निर्यात में सबसे बड़ी हिस्सेदारी रखने वाली मिर्च के निर्यात पर सबसे ज्यादा असर पड़ा। चीन और बांग्लादेश जैसे प्रमुख खरीदार देशों की मांग घटने से मिर्च के निर्यात मूल्य में 12 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 1.17 अरब डॉलर रह गया।

जीरे के निर्यात में भी बड़ी कमी दर्ज की गई। जीरे का निर्यात 14 प्रतिशत घटकर 1.96 लाख टन रहा, जबकि मूल्य के आधार पर इसमें 28 प्रतिशत की गिरावट आई और निर्यात 524 मिलियन डॉलर पर सिमट गया।

हल्दी, मसाला तेल और ओलियोरेजिन के निर्यात में भी कमी दर्ज की गई। वहीं काली मिर्च के निर्यात की मात्रा 5 प्रतिशत घटी, लेकिन बेहतर कीमत मिलने से इसके निर्यात मूल्य में 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

दूसरी ओर कुछ मसालों ने शानदार प्रदर्शन किया। छोटी इलायची के निर्यात में 124 प्रतिशत की रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई और इसका निर्यात 413 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया। बड़ी इलायची, अदरक, इमली, धनिया तथा करी पाउडर और पेस्ट के निर्यात में भी वृद्धि देखने को मिली।

इमली के निर्यात में 42 प्रतिशत और करी पाउडर एवं पेस्ट के निर्यात में 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि पुदीना उत्पादों का निर्यात 15 प्रतिशत घटकर 354 मिलियन डॉलर रह गया।

कुल मिलाकर, मिर्च और जीरे की कमजोर वैश्विक मांग ने भारत के मसाला निर्यात को प्रभावित किया, लेकिन इलायची और अन्य कुछ मसालों के बेहतर प्रदर्शन ने गिरावट को कुछ हद तक सीमित रखने में मदद की।

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— मसालों के निर्यात में गिरावट, मिर्च और जीरे की कमजोर मांग का असर

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ASSOCIATE EDITOR (CONTENT) Ex-Principal correspondent for IndiaSpend Hindi. Previously at Gaon Connection, Nav Bharat Times, Prabhat Khabar, and Dainik Bhaskar. Expertise in agriculture, education, and climate change.

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